समाचार | जेंडर-अफर्मिंग हार्मोन थेरेपी शरीर के प्रोटीन प्रोफाइल को लैंगिक पहचान के अनुरूप ढालती है
ऑस्ट्रेलिया के Murdoch Children’s Research Institute (MCRI) और University of Melbourne के एक नए अध्ययन में पाया गया कि जेंडर-अफर्मिंग हार्मोन थेरेपी (GAHT) शरीर की प्रोटीन संरचना को बदल सकती है, जिससे वह व्यक्ति की लैंगिक पहचान से जुड़े पैटर्न के अधिक निकट आ जाती है। निष्कर्ष बताते हैं कि हार्मोन थेरेपी आणविक स्तर पर जैविक विशेषताओं को कैसे बदलती है और ट्रांसजेंडर लोगों के लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रबंधन में सहायक हो सकती है।
अध्ययन हाल में Nature Medicine में प्रकाशित हुआ। शोधकर्ताओं ने स्त्रीकरण करने वाली हार्मोन थेरेपी से पहले और बाद में 40 वयस्क ट्रांसजेंडर महिलाओं के 5,000 से अधिक प्लाज्मा प्रोटीन की जांच की और उनकी तुलना UK Biobank की 55,000 सिसजेंडर महिलाओं के रक्त नमूनों से की। उपचार के छह महीने बाद, दस प्रमुख लिंग-विभेदित प्रोटीनों में से सात ट्रांसजेंडर महिलाओं में महत्वपूर्ण रूप से बदल गए और सिसजेंडर महिलाओं जैसे पैटर्न दिखाई दिए।
MCRI के एसोसिएट प्रोफेसर Boris Novakovic ने कहा कि यह अध्ययन पहली बार स्पष्ट रूप से दिखाता है कि जेंडर-अफर्मिंग हार्मोन थेरेपी रक्त-प्रोटीन स्तर पर जैविक मार्करों को ‘फिर से लिख’ सकती है और उन्हें लैंगिक पहचान के अधिक निकट ला सकती है।
‘हमने देखा कि थेरेपी ने न केवल पुरुष प्रजनन और प्रजनन क्षमता से जुड़े प्रोटीन बायोमार्करों को कम किया, बल्कि शरीर में वसा के वितरण, स्तन विकास, प्रतिरक्षा कार्य और हृदय-स्वास्थ्य से जुड़े प्रोटीन भी बढ़ाए।’
—एसोसिएट प्रोफेसर Boris Novakovic, MCRI
टीम ने यह भी पाया कि ये बदलाव रजोनिवृत्त महिलाओं में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की शारीरिक प्रतिक्रिया से काफी मिलते-जुलते थे। Novakovic ने कहा कि यह निष्कर्ष वयस्क जैविक लचीलेपन को रेखांकित करता है और दिखाता है कि वयस्क अवस्था में भी शरीर लैंगिक हार्मोन स्तरों में बदलाव पर उल्लेखनीय प्रतिक्रिया दे सकता है।
अध्ययन में यह भी बताया गया कि इन प्रोटीन बदलावों का स्वास्थ्य जोखिमों पर व्यापक प्रभाव हो सकता है। उदाहरण के लिए, ट्रांसजेंडर महिलाओं में एलर्जी या ऑटोइम्यून रोग का जोखिम अधिक स्त्री-विशिष्ट रूप ले सकता है, जबकि हृदय रोग का जोखिम कम हो सकता है।
‘ये परिणाम दिखाते हैं कि हमारी जीवविज्ञान अनुकूलनीय है। लैंगिक हार्मोन में बदलाव केवल बाहरी शारीरिक विशेषताओं को नहीं, बल्कि आणविक स्तर पर स्वास्थ्य जोखिमों को भी बदलते हैं।’
—एसोसिएट प्रोफेसर Boris Novakovic, MCRI
University of Melbourne की प्रोफेसर Ada Cheung ने आगे जोर देकर कहा कि निष्कर्ष व्यक्तिगत ट्रांसजेंडर स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक नई दिशा प्रदान करते हैं।
‘प्रोटीन में बदलावों का अध्ययन करके हम जेंडर-अफर्मिंग हार्मोन थेरेपी की प्रभावशीलता की निगरानी कर सकते हैं और हृदय या प्रतिरक्षा से जुड़े संभावित दुष्प्रभावों का जल्द पता लगा सकते हैं। यह प्रिसिजन मेडिसिन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।’
—प्रोफेसर Ada Cheung, University of Melbourne
शोधकर्ताओं ने जेंडर-अफर्मिंग उपचार प्राप्त करने वाले लोगों के लिए अधिक विस्तृत दीर्घकालिक स्वास्थ्य निगरानी का आह्वान किया, जिसमें शारीरिक बदलावों और लिंग-संबंधी अंतर दोनों को ध्यान में रखा जाए।
अध्ययन का संयुक्त नेतृत्व Murdoch Children’s Research Institute (MCRI) और University of Melbourne ने किया तथा इसे इस प्रकार प्रकाशित किया गया:
Nguyen, N. N. L., et al. (2025). स्त्रीकरण करने वाली जेंडर-अफर्मिंग हार्मोन थेरेपी के दौरान प्लाज्मा प्रोटीओम अनुकूलन। Nature Medicine. doi.org/10.1038/s41591-025-04023-9
समाचार स्रोत:
ऑनलाइन संकलित
लेखक LinkedIVF Teamप्रकाशित 2025-10-27
本文使用 AI 輔助整理;LinkedIVF 尚未記錄本篇的編輯審核,不構成醫療建議。
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समाचार | जेंडर-अफर्मिंग हार्मोन थेरेपी शरीर के प्रोटीन प्रोफाइल को लैंगिक पहचान के अनुरूप ढालती है
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ऑस्ट्रेलिया के Murdoch Children’s Research Institute (MCRI) और University of Melbourne के एक नए अध्ययन में पाया गया कि जेंडर-अफर्मिंग हार्मोन थेरेपी (GAHT) शरीर की प्रोटीन संरचना को बदल सकती है, जिससे वह व्यक्ति की लैंगिक पहचान से जुड़े पैटर्न के अधिक निकट आ जाती है। निष्कर्ष बताते हैं कि हार्मोन थेरेपी आणविक स्तर पर जैविक विशेषताओं को कैसे बदलती है और ट्रांसजेंडर लोगों के लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रबंधन में सहायक हो सकती है।
अध्ययन हाल में Nature Medicine में प्रकाशित हुआ। शोधकर्ताओं ने स्त्रीकरण करने वाली हार्मोन थेरेपी से पहले और बाद में 40 वयस्क ट्रांसजेंडर महिलाओं के 5,000 से अधिक प्लाज्मा प्रोटीन की जांच की और उनकी तुलना UK Biobank की 55,000 सिसजेंडर महिलाओं के रक्त नमूनों से की। उपचार के छह महीने बाद, दस प्रमुख लिंग-विभेदित प्रोटीनों में से सात ट्रांसजेंडर महिलाओं में महत्वपूर्ण रूप से बदल गए और सिसजेंडर महिलाओं जैसे पैटर्न दिखाई दिए।
MCRI के एसोसिएट प्रोफेसर Boris Novakovic ने कहा कि यह अध्ययन पहली बार स्पष्ट रूप से दिखाता है कि जेंडर-अफर्मिंग हार्मोन थेरेपी रक्त-प्रोटीन स्तर पर जैविक मार्करों को ‘फिर से लिख’ सकती है और उन्हें लैंगिक पहचान के अधिक निकट ला सकती है।
‘हमने देखा कि थेरेपी ने न केवल पुरुष प्रजनन और प्रजनन क्षमता से जुड़े प्रोटीन बायोमार्करों को कम किया, बल्कि शरीर में वसा के वितरण, स्तन विकास, प्रतिरक्षा कार्य और हृदय-स्वास्थ्य से जुड़े प्रोटीन भी बढ़ाए।’
—एसोसिएट प्रोफेसर Boris Novakovic, MCRI
टीम ने यह भी पाया कि ये बदलाव रजोनिवृत्त महिलाओं में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की शारीरिक प्रतिक्रिया से काफी मिलते-जुलते थे। Novakovic ने कहा कि यह निष्कर्ष वयस्क जैविक लचीलेपन को रेखांकित करता है और दिखाता है कि वयस्क अवस्था में भी शरीर लैंगिक हार्मोन स्तरों में बदलाव पर उल्लेखनीय प्रतिक्रिया दे सकता है।
अध्ययन में यह भी बताया गया कि इन प्रोटीन बदलावों का स्वास्थ्य जोखिमों पर व्यापक प्रभाव हो सकता है। उदाहरण के लिए, ट्रांसजेंडर महिलाओं में एलर्जी या ऑटोइम्यून रोग का जोखिम अधिक स्त्री-विशिष्ट रूप ले सकता है, जबकि हृदय रोग का जोखिम कम हो सकता है।
‘ये परिणाम दिखाते हैं कि हमारी जीवविज्ञान अनुकूलनीय है। लैंगिक हार्मोन में बदलाव केवल बाहरी शारीरिक विशेषताओं को नहीं, बल्कि आणविक स्तर पर स्वास्थ्य जोखिमों को भी बदलते हैं।’
—एसोसिएट प्रोफेसर Boris Novakovic, MCRI
University of Melbourne की प्रोफेसर Ada Cheung ने आगे जोर देकर कहा कि निष्कर्ष व्यक्तिगत ट्रांसजेंडर स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक नई दिशा प्रदान करते हैं।
‘प्रोटीन में बदलावों का अध्ययन करके हम जेंडर-अफर्मिंग हार्मोन थेरेपी की प्रभावशीलता की निगरानी कर सकते हैं और हृदय या प्रतिरक्षा से जुड़े संभावित दुष्प्रभावों का जल्द पता लगा सकते हैं। यह प्रिसिजन मेडिसिन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।’
—प्रोफेसर Ada Cheung, University of Melbourne
शोधकर्ताओं ने जेंडर-अफर्मिंग उपचार प्राप्त करने वाले लोगों के लिए अधिक विस्तृत दीर्घकालिक स्वास्थ्य निगरानी का आह्वान किया, जिसमें शारीरिक बदलावों और लिंग-संबंधी अंतर दोनों को ध्यान में रखा जाए।
अध्ययन का संयुक्त नेतृत्व Murdoch Children’s Research Institute (MCRI) और University of Melbourne ने किया तथा इसे इस प्रकार प्रकाशित किया गया:
Nguyen, N. N. L., et al. (2025). स्त्रीकरण करने वाली जेंडर-अफर्मिंग हार्मोन थेरेपी के दौरान प्लाज्मा प्रोटीओम अनुकूलन। Nature Medicine. doi.org/10.1038/s41591-025-04023-9
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