समाचार | वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में मानव एंडोमेट्रियम फिर बनाया, जिससे शुरुआती भ्रूणों का आरोपण संभव हुआ



समाचार | वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में मानव एंडोमेट्रियम फिर बनाया, जिससे शुरुआती भ्रूणों का आरोपण संभव हुआ

समाचार | वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में मानव एंडोमेट्रियम फिर बनाया, जिससे शुरुआती भ्रूणों का आरोपण संभव हुआ


ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने पहली बार प्रयोगशाला में मानव एंडोमेट्रियम का प्रत्यारोपण योग्य मॉडल बनाया और उसमें शुरुआती मानव भ्रूणों का जुड़ना व आरोपण कराया। इससे भ्रूण और एंडोमेट्रियम के बीच रासायनिक संकेतों का व्यवस्थित अध्ययन संभव हुआ तथा शुरुआती गर्भावस्था, बार-बार गर्भपात और आरोपण विफलता की जाँच के लिए नया शोध उपकरण मिला।


इस प्रयोग में IVF उपचार के बाद दंपतियों द्वारा दान किए गए शुरुआती भ्रूण इंजीनियर्ड एंडोमेट्रियम में सफलतापूर्वक आरोपित हुए और मानव कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (hCG) का स्राव शुरू किया, जो घरेलू गर्भावस्था परीक्षण पर “नीली रेखा” दिखाने वाला जैवरासायनिक संकेतक है। भ्रूणों ने शुरुआती गर्भावस्था से जुड़े कई संकेत अणु भी बनाए।


अध्ययन का नेतृत्व इंग्लैंड के कैम्ब्रिज स्थित Babraham Institute की टीम ने किया। वरिष्ठ लेखक डॉ. Peter Rugg-Gunn ने कहा: “यह प्रक्रिया देखना अद्भुत था। पहले शुरुआती गर्भावस्था की केवल अलग-अलग झलकियाँ मिलती थीं। यह मॉडल इस महत्वपूर्ण चरण को समझने का नया रास्ता खोलता है।”


भ्रूण का आरोपण आमतौर पर निषेचन के लगभग एक सप्ताह बाद होता है और गर्भावस्था की सफलता के लिए निर्णायक है। नैतिक व तकनीकी सीमाओं के कारण मानव शरीर में इसका सीधे निरीक्षण लगभग असंभव है। वर्तमान जानकारी मुख्यतः शुरुआती गर्भावस्था से लिए गए बहुत कम हिस्टेरेक्टॉमी नमूनों पर आधारित है, जिन्हें 50 वर्ष से अधिक पहले एकत्र किया गया था।


मॉडल बनाने के लिए स्वस्थ महिलाओं की एंडोमेट्रियल बायोप्सी से दो कोशिका प्रकार अलग किए गए: संरचनात्मक सहारा देने वाली स्ट्रोमल कोशिकाएँ और सतह बनाने वाली एपिथीलियल कोशिकाएँ। स्ट्रोमल कोशिकाओं को विघटनीय हाइड्रोजेल में रखा गया और एपिथीलियल कोशिकाओं से सतह ढकी गई, जिससे प्राकृतिक एंडोमेट्रियम जैसी त्रि-आयामी संरचना बनी।


शोधकर्ताओं ने मॉडल में शुरुआती IVF भ्रूण रखे। Cell में प्रकाशित अध्ययन में भ्रूण अपेक्षित रूप से जुड़े और आरोपित हुए तथा hCG व अन्य गर्भावस्था-संबंधी यौगिकों का स्राव तेजी से बढ़ा। कानूनी रूप से अनुमत 14-दिवसीय शोध अवधि में भ्रूणों ने अपरा निर्माण से जुड़ी कोशिकाओं सहित कई विशिष्ट कोशिका प्रकार बनाए।


आरोपण स्थल के विश्लेषण से भ्रूण और एंडोमेट्रियम के बीच दोतरफा आणविक संकेतों का वर्णन हुआ। एक प्रमुख संकेत मार्ग को रासायनिक रूप से रोकने पर अपरा ऊतक में गंभीर दोष विकसित हुए, जिससे मॉडल की उपयोगिता स्पष्ट हुई।


Rugg-Gunn ने कहा कि लगभग आधे मानव भ्रूण अज्ञात कारणों से आरोपित नहीं हो पाते: “यदि हम इन विफलताओं का कारण समझें, तो IVF की सफलता दर में काफी सुधार कर सकते हैं।”


टीम आरोपण के बाद के विकास, विशेषकर अपरा बनने की शुरुआत, का अध्ययन जारी रखेगी। माना जाता है कि गर्भावस्था की कई गंभीर जटिलताएँ इसी अवधि के असामान्य विकास से शुरू होती हैं।


इसी जर्नल में एक चीनी टीम ने ऐसा ही कृत्रिम एंडोमेट्रियल मॉडल और बार-बार आरोपण विफलता (RIF) वाले रोगियों में आरोपण दर बढ़ाने वाली संभावित दवाएँ बताईं, जिससे इस दृष्टिकोण का अंतरराष्ट्रीय महत्व और स्पष्ट हुआ।


University of Manchester के प्रोफेसर John Aplin ने कहा कि सहायक प्रजनन तकनीक के 40 वर्षों से अधिक समय बाद भी भ्रूण आरोपण दर स्थिर है। उन्होंने कहा: “आरोपण अपरा विकास शुरू करता है और गर्भावस्था जारी रहने का केंद्रीय निर्धारक है। यह काम आरोपण दक्षता बढ़ाने वाले उपचारों की खोज का वास्तविक अवसर देता है।”


कहानी का स्रोत:

ऑनलाइन संकलित

लेखक LinkedIVF Teamप्रकाशित 2025-12-26
本文使用 AI 輔助整理;LinkedIVF 尚未記錄本篇的編輯審核,不構成醫療建議。
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