समाचार | हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम की टीम ने अंडाणु कोशिकाओं में नई सिलियरी संरचना खोजी, मानव बांझपन पर नई जानकारी
मनुष्यों के लगभग 70% जीन एक छोटी उष्णकटिबंधीय मछली, ज़ेब्राफ़िश, से समान हैं। इस उच्च समानता, पारदर्शी भ्रूणों और तेज विकास के कारण ज़ेब्राफ़िश जीवविज्ञान और चिकित्सा में व्यापक रूप से प्रयुक्त मॉडल जीव बन गई है।
हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम (HU) के चिकित्सा संकाय में डॉ. यानिव एल्कोबी के नेतृत्व वाली टीम ने वास्तविक समय में ज़ेब्राफ़िश अंडाणु कोशिकाओं का अवलोकन करते हुए अप्रत्याशित रूप से पहले अज्ञात कोशिका संरचना खोजी: अंडाणु कोशिका से आसपास के अंडाणु कोशिकाओं के समूह तक फैला एक सर्पिल, रेशे जैसा सिलियम। यह खोज अंडाणु कोशिका की संरचना संबंधी पारंपरिक समझ को चुनौती देती है और मनुष्यों में गुणसूत्र असामान्यताओं से होने वाले बांझपन तथा गर्भपात के अध्ययन के लिए नई दिशा दे सकती है।
गुणसूत्रों को स्थानांतरित करने वाला सिलियम प्रजनन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है
आगे के शोध से पता चला कि नया खोजा गया सिलियम कार्यशील है। अंडाणु कोशिका के आंतरिक “केबल तंत्र” से जुड़कर यह अर्धसूत्रीविभाजन के दौरान गुणसूत्रों को खींचता और सटीक रूप से स्थित करता है, जिससे अंडाणु के परिपक्व होने पर आनुवंशिक सामग्री को सही और व्यवस्थित ढंग से संगठित करने में मदद मिलती है।
डॉ. एल्कोबी ने समझाया, “यह बाहरी सिलियम एक लंगर की तरह काम करता है और पूरे गुणसूत्र-नियंत्रण तंत्र को स्थिर करता है, ताकि वह कुशलता और विश्वसनीय रूप से काम कर सके।” यह प्रक्रिया अंडाणु के स्वस्थ विकास और स्वस्थ भ्रूण बनने की क्षमता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बाद में टीम ने यही संरचना ज़ेब्राफ़िश शुक्राणु कोशिकाओं तथा चूहे की अंडाणु और शुक्राणु कोशिकाओं में भी पाई। इससे पता चलता है कि यह सिलियम जर्म कोशिकाओं के विकास का व्यापक, लंबे समय से अनदेखा घटक हो सकता है।
मछली से मनुष्यों तक: सिलियरी विकार बांझपन के नए तंत्र का संकेत दे सकता है
मानव प्रजनन में गुणसूत्रों के संरेखण या पृथक्करण की त्रुटियां अक्सर असामान्य भ्रूण विकास, गर्भपात या बांझपन का कारण बनती हैं। इन त्रुटियों के कारण पूरी तरह ज्ञात नहीं हैं। गुणसूत्र संगठन से निकटता से जुड़ी यह नव-पहचानी सिलियरी संरचना, व्याख्या का एक अनुपस्थित भाग हो सकती है।
सिलियोपैथी नामक कुछ दुर्लभ आनुवंशिक विकारों से प्रजनन क्षमता में कमी और शिशुओं व बच्चों में गंभीर विकास संबंधी विकार होने की जानकारी पहले से है। इन समस्याओं को सामान्यतः अन्य ज्ञात प्रकार के सिलिया से जोड़ा गया है। इस नए सिलियम की खोज एक और संभावित व्याख्या देती है।
डॉ. एल्कोबी ने कहा, “इन तंत्रों की पहचान हमें समाधान खोजने के एक कदम और करीब ले जाती है।”
उन्नत कोशिका और इमेजिंग अनुसंधान
सिलियम के गतिशील कार्य को देखने के लिए टीम ने उच्च-रिज़ॉल्यूशन लाइव माइक्रोस्कोपी, त्रि-आयामी इमेजिंग, डिम्बग्रंथि ऊतक संवर्धन, लेज़र एब्लेशन व हेरफेर, और कई आनुवंशिक उत्परिवर्तन विश्लेषण सहित उन्नत विधियां विकसित कर उनका उपयोग किया। इन तकनीकों ने मिलकर पहली बार संरचना और उसके कार्य का स्पष्ट दृश्य प्रदान किया।
अध्ययन का सह-नेतृत्व डॉ. एल्कोबी के डॉक्टरेट विद्यार्थियों अवीशाग माइटलिस और विनीत कुमार ने किया। इसमें सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ मॉलिक्यूलर एंड सेल बायोलॉजी (Proteos) में डॉ. सुदीप्तो रॉय की प्रयोगशाला और यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख में डॉ. रुक्सांद्रा बाखमान-गागेस्कू की प्रयोगशाला का अंतरराष्ट्रीय सहयोग था।
निष्कर्ष Science में “Biomechanical control of meiotic chromosomal bouquet and germ cell morphogenesis by the zygotene cilium” शीर्षक लेख में प्रकाशित हुए।
स्रोत:
ऑनलाइन संकलित
लेखक LinkedIVF Teamप्रकाशित 2025-06-13
本文使用 AI 輔助整理;LinkedIVF 尚未記錄本篇的編輯審核,不構成醫療建議。
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समाचार | हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम की टीम ने अंडाणु कोशिकाओं में नई सिलियरी संरचना खोजी, मानव बांझपन पर नई जानकारी
समाचार | हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम की टीम ने अंडाणु कोशिकाओं में नई सिलियरी संरचना खोजी, मानव बांझपन पर नई जानकारी
मनुष्यों के लगभग 70% जीन एक छोटी उष्णकटिबंधीय मछली, ज़ेब्राफ़िश, से समान हैं। इस उच्च समानता, पारदर्शी भ्रूणों और तेज विकास के कारण ज़ेब्राफ़िश जीवविज्ञान और चिकित्सा में व्यापक रूप से प्रयुक्त मॉडल जीव बन गई है।
हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम (HU) के चिकित्सा संकाय में डॉ. यानिव एल्कोबी के नेतृत्व वाली टीम ने वास्तविक समय में ज़ेब्राफ़िश अंडाणु कोशिकाओं का अवलोकन करते हुए अप्रत्याशित रूप से पहले अज्ञात कोशिका संरचना खोजी: अंडाणु कोशिका से आसपास के अंडाणु कोशिकाओं के समूह तक फैला एक सर्पिल, रेशे जैसा सिलियम। यह खोज अंडाणु कोशिका की संरचना संबंधी पारंपरिक समझ को चुनौती देती है और मनुष्यों में गुणसूत्र असामान्यताओं से होने वाले बांझपन तथा गर्भपात के अध्ययन के लिए नई दिशा दे सकती है।
गुणसूत्रों को स्थानांतरित करने वाला सिलियम प्रजनन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है
आगे के शोध से पता चला कि नया खोजा गया सिलियम कार्यशील है। अंडाणु कोशिका के आंतरिक “केबल तंत्र” से जुड़कर यह अर्धसूत्रीविभाजन के दौरान गुणसूत्रों को खींचता और सटीक रूप से स्थित करता है, जिससे अंडाणु के परिपक्व होने पर आनुवंशिक सामग्री को सही और व्यवस्थित ढंग से संगठित करने में मदद मिलती है।
डॉ. एल्कोबी ने समझाया, “यह बाहरी सिलियम एक लंगर की तरह काम करता है और पूरे गुणसूत्र-नियंत्रण तंत्र को स्थिर करता है, ताकि वह कुशलता और विश्वसनीय रूप से काम कर सके।” यह प्रक्रिया अंडाणु के स्वस्थ विकास और स्वस्थ भ्रूण बनने की क्षमता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बाद में टीम ने यही संरचना ज़ेब्राफ़िश शुक्राणु कोशिकाओं तथा चूहे की अंडाणु और शुक्राणु कोशिकाओं में भी पाई। इससे पता चलता है कि यह सिलियम जर्म कोशिकाओं के विकास का व्यापक, लंबे समय से अनदेखा घटक हो सकता है।
मछली से मनुष्यों तक: सिलियरी विकार बांझपन के नए तंत्र का संकेत दे सकता है
मानव प्रजनन में गुणसूत्रों के संरेखण या पृथक्करण की त्रुटियां अक्सर असामान्य भ्रूण विकास, गर्भपात या बांझपन का कारण बनती हैं। इन त्रुटियों के कारण पूरी तरह ज्ञात नहीं हैं। गुणसूत्र संगठन से निकटता से जुड़ी यह नव-पहचानी सिलियरी संरचना, व्याख्या का एक अनुपस्थित भाग हो सकती है।
सिलियोपैथी नामक कुछ दुर्लभ आनुवंशिक विकारों से प्रजनन क्षमता में कमी और शिशुओं व बच्चों में गंभीर विकास संबंधी विकार होने की जानकारी पहले से है। इन समस्याओं को सामान्यतः अन्य ज्ञात प्रकार के सिलिया से जोड़ा गया है। इस नए सिलियम की खोज एक और संभावित व्याख्या देती है।
डॉ. एल्कोबी ने कहा, “इन तंत्रों की पहचान हमें समाधान खोजने के एक कदम और करीब ले जाती है।”
उन्नत कोशिका और इमेजिंग अनुसंधान
सिलियम के गतिशील कार्य को देखने के लिए टीम ने उच्च-रिज़ॉल्यूशन लाइव माइक्रोस्कोपी, त्रि-आयामी इमेजिंग, डिम्बग्रंथि ऊतक संवर्धन, लेज़र एब्लेशन व हेरफेर, और कई आनुवंशिक उत्परिवर्तन विश्लेषण सहित उन्नत विधियां विकसित कर उनका उपयोग किया। इन तकनीकों ने मिलकर पहली बार संरचना और उसके कार्य का स्पष्ट दृश्य प्रदान किया।
अध्ययन का सह-नेतृत्व डॉ. एल्कोबी के डॉक्टरेट विद्यार्थियों अवीशाग माइटलिस और विनीत कुमार ने किया। इसमें सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ मॉलिक्यूलर एंड सेल बायोलॉजी (Proteos) में डॉ. सुदीप्तो रॉय की प्रयोगशाला और यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख में डॉ. रुक्सांद्रा बाखमान-गागेस्कू की प्रयोगशाला का अंतरराष्ट्रीय सहयोग था।
निष्कर्ष Science में “Biomechanical control of meiotic chromosomal bouquet and germ cell morphogenesis by the zygotene cilium” शीर्षक लेख में प्रकाशित हुए।
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ऑनलाइन संकलित