समाचार | किंग्स कॉलेज लंदन अध्ययन: प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (PGT-A) 35 से अधिक आयु की महिलाओं को जल्दी बच्चा पाने में मदद कर सकती है
किंग्स कॉलेज लंदन, किंग्स कॉलेज हॉस्पिटल और किंग्स फर्टिलिटी द्वारा किए गए एक क्लिनिकल परीक्षण में पाया गया कि एन्यूप्लॉइडी के लिए प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (PGT-A) इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) करा रही 35 से अधिक आयु की महिलाओं को जल्दी गर्भधारण और जीवित जन्म पाने में मदद कर सकती है।
यह दुनिया का पहला रैंडमाइज्ड नियंत्रित परीक्षण था जिसमें विशेष रूप से 35–42 आयु की महिलाएं शामिल थीं। इस समूह में IVF के दौरान गुणसूत्रीय रूप से असामान्य भ्रूण बनने की संभावना अधिक होती है, जिससे इम्प्लांटेशन विफलता या गर्भपात का जोखिम बढ़ जाता है।
अध्ययन की रूपरेखा और नवाचार
परीक्षण जून 2021 से जून 2023 तक किंग्स फर्टिलिटी में हुआ और इसमें सहायक प्रजनन उपचार ले रही 100 महिलाएं शामिल थीं। पचास का PGT-A किया गया और 50 नियंत्रण समूह में थीं। पिछले अध्ययनों से अलग, इस परीक्षण में मोज़ेक भ्रूण शामिल थे, जिनमें सामान्य और असामान्य दोनों प्रकार की कोशिकाएं होती हैं। ये भ्रूण क्लिनिकल प्रैक्टिस में आम हैं, लेकिन पहले के शोध में अक्सर बाहर रखे गए थे।
यूके के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस (NICE) के वर्तमान दिशानिर्देश नियमित PGT-A की सिफारिश नहीं करते, क्योंकि पिछले शोध मुख्यतः कम आयु की महिलाओं पर केंद्रित थे। उनके भ्रूणों में गुणसूत्रीय असामान्यताओं की दर कम होती है और इसलिए समग्र लाभ सीमित दिखा। अधिक महिलाएं अधिक आयु में गर्भधारण का प्रयास कर रही हैं, इसलिए साक्ष्य के इस अंतर को दूर करना आवश्यक है।
मुख्य निष्कर्ष
परिणामों से पता चला:
तीन ट्रांसफर चक्रों में PGT-A समूह में संचयी जीवित-जन्म दर 72% थी, जबकि नियंत्रण समूह में 52% थी।
PGT-A समूह की मरीजों को गर्भधारण के लिए औसतन कम ट्रांसफर की जरूरत पड़ी, जिससे गर्भधारण तक का समय और प्रतीक्षा व असफल प्रयासों का भावनात्मक तथा शारीरिक बोझ कम हुआ।
नमूना आकार सीमित होने के कारण अंतर सांख्यिकीय महत्व तक नहीं पहुंचा, लेकिन रुझान ने स्पष्ट संभावित लाभ दिखाया। टीम ने बड़े, बहुकेंद्रित रैंडमाइज्ड नियंत्रित परीक्षण में पुष्टि की सिफारिश की है।
विशेषज्ञों की व्याख्या
किंग्स कॉलेज लंदन और किंग्स फर्टिलिटी के प्रथम लेखक यूसुफ बीबीजून, PhD, ने कहा:
“हमारा अध्ययन बताता है कि 35 से अधिक आयु की महिलाओं के लिए PGT-A उन्हें जल्दी बच्चा पाने में मदद कर सकता है, साथ ही बार-बार असफल प्रयासों के मनोवैज्ञानिक तनाव को कम कर सकता है।”
किंग्स कॉलेज लंदन के सह-लेखक सेश सुंकारा, PhD, ने जोड़ा:
“यह अध्ययन न केवल अधिक आयु की महिलाओं पर केंद्रित था, बल्कि इसमें मोज़ेक भ्रूण भी शामिल थे, जो पहले शायद ही कवर किया गया क्षेत्र था। उपचार की दक्षता बढ़ाने और गर्भधारण व जीवित जन्म तक का समय घटाने से अधिक आयु की मरीजों का शारीरिक और भावनात्मक बोझ सीधे कम होगा।”
किंग्स फर्टिलिटी के निदेशक इपोक्रातिस सारिस, PhD, ने जोर दिया:
“यह महत्वपूर्ण परीक्षण मरीजों की भर्ती से लेकर किंग्स फर्टिलिटी में प्रयोगशाला प्रक्रियाओं तक पूरी तरह हमारी टीम ने संचालित किया। अधिक आयु की महिलाओं को अधिक सटीक प्रजनन देखभाल देने के लिए हम बड़ा बहुकेंद्रित अध्ययन करेंगे।”
पृष्ठभूमि और महत्व
अधिक महिलाएं 35 की आयु के बाद परिवार शुरू करना चुन रही हैं, जब भ्रूण में गुणसूत्रीय असामान्यताओं और गर्भपात की अधिक दर अतिरिक्त चुनौतियां पेश करती है। PGT-A ट्रांसफर से पहले असामान्य गुणसूत्र संख्या के लिए भ्रूणों की जांच करता है, जिससे अधिक क्षमता वाले भ्रूण चुनने और उपचार दक्षता सुधारने में मदद मिलती है।
PGT-A का नियमित उपयोग विवादास्पद बना हुआ है, लेकिन यह अध्ययन अधिक आयु की महिलाओं में इसके महत्व के नए साक्ष्य देता है। भविष्य के बहुकेंद्रित शोध से इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि होने पर यह अंतरराष्ट्रीय प्रजनन दिशानिर्देशों के अद्यतन का समर्थन कर सकता है और अधिक अधिक आयु की मरीजों का उपचार छोटा कर सकता है।
समाचार स्रोत:
ऑनलाइन संकलित
लेखक LinkedIVF Teamप्रकाशित 2025-09-05
本文使用 AI 輔助整理;LinkedIVF 尚未記錄本篇的編輯審核,不構成醫療建議。
यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है और चिकित्सा सलाह नहीं है। किसी लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक से परामर्श लें। सामग्री दिशानिर्देश और संपादकीय नीति
समाचार | किंग्स कॉलेज लंदन अध्ययन: प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (PGT-A) 35 से अधिक आयु की महिलाओं को जल्दी बच्चा पाने में मदद कर सकती है
समाचार | किंग्स कॉलेज लंदन अध्ययन: प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (PGT-A) 35 से अधिक आयु की महिलाओं को जल्दी बच्चा पाने में मदद कर सकती है
किंग्स कॉलेज लंदन, किंग्स कॉलेज हॉस्पिटल और किंग्स फर्टिलिटी द्वारा किए गए एक क्लिनिकल परीक्षण में पाया गया कि एन्यूप्लॉइडी के लिए प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (PGT-A) इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) करा रही 35 से अधिक आयु की महिलाओं को जल्दी गर्भधारण और जीवित जन्म पाने में मदद कर सकती है।
यह दुनिया का पहला रैंडमाइज्ड नियंत्रित परीक्षण था जिसमें विशेष रूप से 35–42 आयु की महिलाएं शामिल थीं। इस समूह में IVF के दौरान गुणसूत्रीय रूप से असामान्य भ्रूण बनने की संभावना अधिक होती है, जिससे इम्प्लांटेशन विफलता या गर्भपात का जोखिम बढ़ जाता है।
अध्ययन की रूपरेखा और नवाचार
परीक्षण जून 2021 से जून 2023 तक किंग्स फर्टिलिटी में हुआ और इसमें सहायक प्रजनन उपचार ले रही 100 महिलाएं शामिल थीं। पचास का PGT-A किया गया और 50 नियंत्रण समूह में थीं। पिछले अध्ययनों से अलग, इस परीक्षण में मोज़ेक भ्रूण शामिल थे, जिनमें सामान्य और असामान्य दोनों प्रकार की कोशिकाएं होती हैं। ये भ्रूण क्लिनिकल प्रैक्टिस में आम हैं, लेकिन पहले के शोध में अक्सर बाहर रखे गए थे।
यूके के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस (NICE) के वर्तमान दिशानिर्देश नियमित PGT-A की सिफारिश नहीं करते, क्योंकि पिछले शोध मुख्यतः कम आयु की महिलाओं पर केंद्रित थे। उनके भ्रूणों में गुणसूत्रीय असामान्यताओं की दर कम होती है और इसलिए समग्र लाभ सीमित दिखा। अधिक महिलाएं अधिक आयु में गर्भधारण का प्रयास कर रही हैं, इसलिए साक्ष्य के इस अंतर को दूर करना आवश्यक है।
मुख्य निष्कर्ष
परिणामों से पता चला:
तीन ट्रांसफर चक्रों में PGT-A समूह में संचयी जीवित-जन्म दर 72% थी, जबकि नियंत्रण समूह में 52% थी।
PGT-A समूह की मरीजों को गर्भधारण के लिए औसतन कम ट्रांसफर की जरूरत पड़ी, जिससे गर्भधारण तक का समय और प्रतीक्षा व असफल प्रयासों का भावनात्मक तथा शारीरिक बोझ कम हुआ।
नमूना आकार सीमित होने के कारण अंतर सांख्यिकीय महत्व तक नहीं पहुंचा, लेकिन रुझान ने स्पष्ट संभावित लाभ दिखाया। टीम ने बड़े, बहुकेंद्रित रैंडमाइज्ड नियंत्रित परीक्षण में पुष्टि की सिफारिश की है।
विशेषज्ञों की व्याख्या
किंग्स कॉलेज लंदन और किंग्स फर्टिलिटी के प्रथम लेखक यूसुफ बीबीजून, PhD, ने कहा:
“हमारा अध्ययन बताता है कि 35 से अधिक आयु की महिलाओं के लिए PGT-A उन्हें जल्दी बच्चा पाने में मदद कर सकता है, साथ ही बार-बार असफल प्रयासों के मनोवैज्ञानिक तनाव को कम कर सकता है।”
किंग्स कॉलेज लंदन के सह-लेखक सेश सुंकारा, PhD, ने जोड़ा:
“यह अध्ययन न केवल अधिक आयु की महिलाओं पर केंद्रित था, बल्कि इसमें मोज़ेक भ्रूण भी शामिल थे, जो पहले शायद ही कवर किया गया क्षेत्र था। उपचार की दक्षता बढ़ाने और गर्भधारण व जीवित जन्म तक का समय घटाने से अधिक आयु की मरीजों का शारीरिक और भावनात्मक बोझ सीधे कम होगा।”
किंग्स फर्टिलिटी के निदेशक इपोक्रातिस सारिस, PhD, ने जोर दिया:
“यह महत्वपूर्ण परीक्षण मरीजों की भर्ती से लेकर किंग्स फर्टिलिटी में प्रयोगशाला प्रक्रियाओं तक पूरी तरह हमारी टीम ने संचालित किया। अधिक आयु की महिलाओं को अधिक सटीक प्रजनन देखभाल देने के लिए हम बड़ा बहुकेंद्रित अध्ययन करेंगे।”
पृष्ठभूमि और महत्व
अधिक महिलाएं 35 की आयु के बाद परिवार शुरू करना चुन रही हैं, जब भ्रूण में गुणसूत्रीय असामान्यताओं और गर्भपात की अधिक दर अतिरिक्त चुनौतियां पेश करती है। PGT-A ट्रांसफर से पहले असामान्य गुणसूत्र संख्या के लिए भ्रूणों की जांच करता है, जिससे अधिक क्षमता वाले भ्रूण चुनने और उपचार दक्षता सुधारने में मदद मिलती है।
PGT-A का नियमित उपयोग विवादास्पद बना हुआ है, लेकिन यह अध्ययन अधिक आयु की महिलाओं में इसके महत्व के नए साक्ष्य देता है। भविष्य के बहुकेंद्रित शोध से इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि होने पर यह अंतरराष्ट्रीय प्रजनन दिशानिर्देशों के अद्यतन का समर्थन कर सकता है और अधिक अधिक आयु की मरीजों का उपचार छोटा कर सकता है।
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