समाचार | प्लेसेंटा एक्रीटा क्यों होता है? UCLA ने दी एक व्याख्या
UCLA Health के नेतृत्व में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि प्लेसेंटा एक्रीटा स्पेक्ट्रम (PAS) स्वयं प्लेसेंटा की असामान्य वृद्धि से नहीं, बल्कि पिछले सीजेरियन के निशान के भरने के दौरान कोलेजन के अव्यवस्थित होने से होता है। इससे प्लेसेंटा और गर्भाशय के बीच की सामान्य बाधा प्रभावित होती है।
कभी दुर्लभ माना जाने वाला PAS अब हर वर्ष लगभग 14,000 गर्भधारण को प्रभावित करता है और प्रसवोत्तर गंभीर रक्तस्राव तथा मातृ मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार में बहुत गहराई तक घुस जाता है और प्रसव के बाद सामान्य रूप से अलग नहीं हो पाता, जिसके लिए अक्सर हिस्टेरेक्टॉमी करनी पड़ती है।
पिछला सीजेरियन प्रसव PAS का सबसे मजबूत और आम जोखिम कारक है, लेकिन जैविक प्रक्रिया लंबे समय से स्पष्ट नहीं थी। UCLA Health का अध्ययन इसका एक महत्वपूर्ण संकेत देता है।
संबंधित लेखिका Yalda Afshar ने कहा, "प्लेसेंटा एक्रीटा में असली समस्या प्लेसेंटा नहीं, बल्कि गर्भाशय के निशान वाले ऊतक का भरना है।" वह UCLA David Geffen School of Medicine में मातृ-भ्रूण चिकित्सा की एसोसिएट प्रोफेसर और UCLA Health Placenta Accreta Spectrum Care Program की सह-निदेशक हैं। "निशान गर्भाशय में कोलेजन की संरचना और व्यवस्था बदल देता है, जिससे प्रसव के जोखिम काफी बढ़ जाते हैं।"
American Journal of Obstetrics and Gynecology में प्रकाशित इस अध्ययन में मानव शल्य नमूने, चूहे के मॉडल और प्रयोगशाला में बनाए गए "प्लेसेंटा एक्रीटा मॉडल" को मिलाया गया। उन्नत त्रि-आयामी इमेजिंग में पिछले गर्भाशय निशानों पर उलझे और अव्यवस्थित कोलेजन तंतु दिखे, जो ऊतक की सीमा को कमजोर करते हैं और प्लेसेंटा के असामान्य जुड़ाव व प्रवेश की स्थितियां बनाते हैं।
टीम ने PAS वाली 13 रोगियों और PAS के बिना जोखिम वाली 10 रोगियों के ऊतक का अध्ययन किया तथा प्लेसेंटा के जुड़ने और न जुड़ने वाले स्थानों से नमूने लिए। लगातार बनी सूजन और मैक्रोफेज ने निशान के सामान्य पुनर्गठन को बाधित किया, जिससे असामान्य कोलेजन बना और प्लेसेंटा के जुड़ाव को बढ़ावा मिला।
सभी सीजेरियन निशान एक ही तरह से नहीं भरते। इससे समझा जा सकता है कि पिछले सीजेरियन के बावजूद कुछ महिलाओं में PAS क्यों होता है और कुछ में क्यों नहीं।
Afshar ने कहा कि गर्भावस्था से पहले या उसके शुरुआती चरण में निशान के भरने और कोलेजन की संरचना का आकलन करने से भविष्य में उच्च जोखिम वाली रोगियों की पहचान और प्रसवपूर्व देखभाल व परिणामों में सुधार हो सकता है।
यह तंत्र नई इमेजिंग, बायोमार्कर या ऐसे हस्तक्षेपों का आधार भी बन सकता है जो सीजेरियन की दरें अधिक रहने के बीच मातृ और शिशु जोखिम घटाएं।
समाचार स्रोत:
ऑनलाइन संकलित
लेखक LinkedIVF Teamप्रकाशित 2026-01-08
本文使用 AI 輔助整理;LinkedIVF 尚未記錄本篇的編輯審核,不構成醫療建議。
यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है और चिकित्सा सलाह नहीं है। किसी लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक से परामर्श लें। सामग्री दिशानिर्देश और संपादकीय नीति
समाचार | प्लेसेंटा एक्रीटा क्यों होता है? UCLA ने दी एक व्याख्या
समाचार | प्लेसेंटा एक्रीटा क्यों होता है? UCLA ने दी एक व्याख्या
UCLA Health के नेतृत्व में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि प्लेसेंटा एक्रीटा स्पेक्ट्रम (PAS) स्वयं प्लेसेंटा की असामान्य वृद्धि से नहीं, बल्कि पिछले सीजेरियन के निशान के भरने के दौरान कोलेजन के अव्यवस्थित होने से होता है। इससे प्लेसेंटा और गर्भाशय के बीच की सामान्य बाधा प्रभावित होती है।
कभी दुर्लभ माना जाने वाला PAS अब हर वर्ष लगभग 14,000 गर्भधारण को प्रभावित करता है और प्रसवोत्तर गंभीर रक्तस्राव तथा मातृ मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार में बहुत गहराई तक घुस जाता है और प्रसव के बाद सामान्य रूप से अलग नहीं हो पाता, जिसके लिए अक्सर हिस्टेरेक्टॉमी करनी पड़ती है।
पिछला सीजेरियन प्रसव PAS का सबसे मजबूत और आम जोखिम कारक है, लेकिन जैविक प्रक्रिया लंबे समय से स्पष्ट नहीं थी। UCLA Health का अध्ययन इसका एक महत्वपूर्ण संकेत देता है।
संबंधित लेखिका Yalda Afshar ने कहा, "प्लेसेंटा एक्रीटा में असली समस्या प्लेसेंटा नहीं, बल्कि गर्भाशय के निशान वाले ऊतक का भरना है।" वह UCLA David Geffen School of Medicine में मातृ-भ्रूण चिकित्सा की एसोसिएट प्रोफेसर और UCLA Health Placenta Accreta Spectrum Care Program की सह-निदेशक हैं। "निशान गर्भाशय में कोलेजन की संरचना और व्यवस्था बदल देता है, जिससे प्रसव के जोखिम काफी बढ़ जाते हैं।"
American Journal of Obstetrics and Gynecology में प्रकाशित इस अध्ययन में मानव शल्य नमूने, चूहे के मॉडल और प्रयोगशाला में बनाए गए "प्लेसेंटा एक्रीटा मॉडल" को मिलाया गया। उन्नत त्रि-आयामी इमेजिंग में पिछले गर्भाशय निशानों पर उलझे और अव्यवस्थित कोलेजन तंतु दिखे, जो ऊतक की सीमा को कमजोर करते हैं और प्लेसेंटा के असामान्य जुड़ाव व प्रवेश की स्थितियां बनाते हैं।
टीम ने PAS वाली 13 रोगियों और PAS के बिना जोखिम वाली 10 रोगियों के ऊतक का अध्ययन किया तथा प्लेसेंटा के जुड़ने और न जुड़ने वाले स्थानों से नमूने लिए। लगातार बनी सूजन और मैक्रोफेज ने निशान के सामान्य पुनर्गठन को बाधित किया, जिससे असामान्य कोलेजन बना और प्लेसेंटा के जुड़ाव को बढ़ावा मिला।
सभी सीजेरियन निशान एक ही तरह से नहीं भरते। इससे समझा जा सकता है कि पिछले सीजेरियन के बावजूद कुछ महिलाओं में PAS क्यों होता है और कुछ में क्यों नहीं।
Afshar ने कहा कि गर्भावस्था से पहले या उसके शुरुआती चरण में निशान के भरने और कोलेजन की संरचना का आकलन करने से भविष्य में उच्च जोखिम वाली रोगियों की पहचान और प्रसवपूर्व देखभाल व परिणामों में सुधार हो सकता है।
यह तंत्र नई इमेजिंग, बायोमार्कर या ऐसे हस्तक्षेपों का आधार भी बन सकता है जो सीजेरियन की दरें अधिक रहने के बीच मातृ और शिशु जोखिम घटाएं।
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